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कोटगेट-सांखला फाटक: अंडरपास का विरोध तेज, लोगों ने रेल बाईपास को बताया असली समाधान

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बीकानेर। शहर के कोटगेट और सांखला रेल फाटक की समस्या को लेकर स्टेशन रोड स्थित होटल लालजी में बीकानेर व्यापार एसोसिएशन और जन संघर्ष समिति की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रशासन के अंडरपास बनाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया गया और ‘रेल बाईपास’ को ही शहर के लिए एकमात्र स्थायी समाधान बताया गया।

मुख्य वक्ता पूर्व विधायक आर.के. दासगुप्ता ने स्पष्ट किया कि रेल बाईपास की मांग हमारी नहीं, बल्कि बीकानेर के मास्टर प्लान का हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के बीच अंडरपास बनाना अव्यवहारिक है और यह भविष्य में ‘मौत का कुआं’ साबित होगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष नरपत सेठिया ने चिंता जताते हुए कहा कि कोटगेट की एक ऐतिहासिक पहचान है। यहां अंडरपास बनने से शहर का हेरिटेज लुक खराब होगा और सांखला फाटक पर दीवार खींचने से पूरा बाजार और वहां आने वाली जनता बुरी तरह प्रभावित होगी।

बैठक में प्रवक्ता श्याम कुमार तंवर ने याद दिलाया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बीकानेर दौरे पर नाल से पलाना तक बाईपास की घोषणा कर चुके हैं। रेलवे द्वारा 400 करोड़ से ज्यादा की डीपीआर बनाने का स्वागत करते हुए उन्होंने मांग रखी कि ट्रैक का दोहरीकरण और यात्री ट्रेनें भी इसी बाईपास से निकाली जाएं, ताकि बीकानेर में अंडरपास बनाने की नौबत ही ना आए। इसके बाद सचिव उमेश मेहंदीरत्ता ने नक्शे के जरिए मौजूदा प्लान की कमियां बताते हुए कहा कि कोटगेट पर महज 4 मीटर का अंडरपास प्रस्तावित है, जो इतना छोटा है कि इससे समस्या सुलझने के बजाय और विकराल हो जाएगी।

इस दौरान जन जागरूकता अभियान के लिए एक पोस्टर का विमोचन भी किया गया। बैठक में केईएम रोड व्यापार एसोसिएशन के सचिव जतिन यादव, कोटगेट से मनोज झाबक, कोयला गली से अशरफ अली व बाबू अली समेत बड़ी संख्या में व्यापारी और संघर्ष समिति के सदस्य मौजूद रहे।

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